पॉज़/प्ले आइकन

प्रधानाध्यापक का संदेश

श्री वी. थिरुनावुकारसु, भा.व.से. प्रधानाचार्य के.अ.रा.व.से. , कोयंबटूर

भारत में वैज्ञानिक वन प्रबंधन विश्व के सबसे प्राचीन प्रबंधनों में से एक है। भारत ने वनों के वैज्ञानिक प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और आज भी विश्व के प्रमुख वानिकी केंद्रों में अपनी सराहनीय स्थिति बनाए हुए है।

भारत की वन सेवा की पुरानी परंपरा रही है, जहाँ कई लोग इस पेशे को चुनकर पेड़ों, जानवरों, कीड़ों, पक्षियों और व्यापक रूप से हमारे वनों व प्रकृति की विविध और समृद्ध जैव-विविधता में रुचि रखते रहे हैं। उन्होंने इसे केवल पदीय कर्तव्य नहीं माना, बल्कि अग्रणी प्रकृतिविदों के रूप में अपनाया।

वानिकी में करियर एक आकर्षक विकल्प है। वनपालों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की जिम्मेदारी उठाने का विशेषाधिकार प्राप्त है, जिन्हें विविध कार्यों को संभालने के लिए सीखने, कुशल और समर्पित होने की आवश्यकता है।

पिछले कुछ वर्षों में, भारत में वानिकी का पेशा वैज्ञानिक हो गया है, और वानिकी शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण की गुणवत्ता में लगातार वृद्धि हुई है। आज केंद्र और राज्य सरकारों के अधीन विभिन्न संस्थान पेशेवर रूप से सक्षम कार्यबल तैयार करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

इसी परंपरा के रूप में, केंद्रीय अकादमी राज्य वन सेवा, कोयंबटूर, वन प्रशिक्षण की शानदार परंपरा और समृद्ध इतिहास का धनी है। अधिकारी प्रशिक्षु वन विज्ञान के सिद्धांत और व्यवहार में अच्छा ज्ञान प्राप्त करते हैं तथा क्षेत्रीय भ्रमण, क्षेत्रीय अभ्यास और विशेष मॉड्यूल्स के माध्यम से वन के पुष्पीय एवं प्राणीय जैव-विविधता से निरंतर परिचित होते रहते हैं।अकादमी में उनके रहने का प्रत्येक क्षण इसकी गौरवशाली परंपरा से जीवंत रहा होगा।इस अकादमी से उत्तीर्ण अधिकारी प्रशिक्षु अपने प्रशिक्षण काल में प्रदर्शित उत्साह और जोश के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे और देश में वन प्रशासन का एक महत्वपूर्ण एवं अभिन्न अंग बनेंगे। वे एक समर्पित वन अधिकारी के रूप में विभाग तथा समुदायों दोनों के लिए लाभकारी सिद्ध होंगे।

श्री वी. थिरुनावुकारसु, भा.व.से.
प्रधानाचार्य
के.अ.रा.व.से. , कोयंबटूर