पॉज़/प्ले आइकन

मान्यता प्राप्त संस्थान

अधिकृत संस्थाएं

हि.प्र.व.अ. सुन्दरनगर की छविहिमांचल प्रदेश वन अकादमी (हि.प्र.व.अ.), सुन्दरनगर, हिमाचल प्रदेश वन रक्षकों तथा वन रेंज अधिकारियों के लिए प्रारंभिक प्रशिक्षण एवं सेवारत वन कर्मियों के लिए पुनश्चर्या प्रशिक्षण पाठ्यक्रम आयोजित करता है। संस्थान ने वर्ष 1993 में वन रक्षकों का प्रशिक्षण प्रारंभ किया था और तब से अब तक 31 बैच प्रशिक्षण पूर्ण कर चुके हैं। इसी प्रकार, वर्ष 2012 में वन शिक्षा निदेशालय, देहरादून के माध्यम से संस्थान को वन रेंज अधिकारियों के लिए 18 माह का प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम संचालित करने हेतु सूचीबद्ध किया गया, जिसके अंतर्गत अब तक 4 बैचों के कुल 135 वन रेंज अधिकारी प्रशिक्षण पूर्ण कर चुके हैं।

नियमित प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के अतिरिक्त, वानिकी एवं वन्यजीव से संबंधित विषयों पर सेवारत अग्रिम पंक्ति के वन कर्मचारी, मंत्रालयिक कर्मचारी तथा विभिन्न स्तर के अधिकारियों के लिए विशेष तौर पर तैयार पुनश्चर्या प्रशिक्षण पाठ्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।

हि.प्र.व.अ., सुन्दरनगर समुद्र तल से लगभग 1000 मीटर की ऊँचाई पर वन चेतना केंद्र, डीपीएफ त्रांबरीकरनौडी के निकट स्थित है। यह लगभग 1.2 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है तथा यह राष्ट्रीय राजमार्ग-21 (चंडीगढ़–मनाली मार्ग) पर सुन्दरनगर बस स्टैंड से लगभग 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

गुजरात वन की छविगुजरात वन रेंज कॉलेज की स्थापना वर्ष 1979 में देश के विभिन्न राज्यों के वन रेंज अधिकारियों को प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से की गई थी। यह कॉलेज वर्तमान में वाडिया पैलेस नामक परिसर में स्थित है, जो तालुका नांदोद, ज़िला नर्मदा, राजपीपला, गुजरात में स्थित है। इस महल का निर्माण तत्कालीन राजपीपला के स्वर्गीय राजा श्री विजय सिंहजी गोहिल द्वारा कराया गया था। स्वतंत्रता के बाद यह संपत्ति बॉम्बे सरकार को बेच दी गई, जो 1960 के बाद गुजरात सरकार की संपत्ति बन गई। वाडिया पैलेस का कुल क्षेत्रफल लगभग 64.08 हेक्टेयर है, जिसमें से 56.08 हेक्टेयर क्षेत्र में जी.एफ.आर.सी. स्थित है तथा शेष 8.00 हेक्टेयर क्षेत्र में सरकारी आयुर्वेदिक औषधालय स्थित है।

वन रेंज अधिकारी प्रशिक्षुओं का पहला बैच 1979–81 के दौरान 31 प्रशिक्षुओं की संख्या के साथ मूल प्रशिक्षण के साथ पूर्ण हुआ, इसके बाद के बैचों में 17 विभिन्न बैचों के अंतर्गत कुल 564 वन रेंज अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इस कॉलेज ने कुल 12 राज्यों एवं 1 केंद्र शासित प्रदेश के अधिकारी प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण प्रदान किया है। कॉलेज के पूर्व छात्र उत्तर प्रदेश, नागालैंड, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक, जम्मू एवं कश्मीर, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा केंद्र शासित प्रदेश दमन एवं दीव और दादरा एवं नगर हवेली में कार्यरत हैं।

कॉलेज द्वारा अब तक 341 सहायक वनपाल तथा 465 सहायक वनरक्षक को भी प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त कॉलेज द्वारा अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक पाठ्यक्रम तथा अग्रिम पंक्ति के कर्मचारीयों के लिए भी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। कॉलेज ने विभाग के सर्वेयर, लिपिक एवं लेखाकारों के लिए भी समय-समय पर प्रशिक्षण आयोजित किए गए हैं।

कॉलेज में कक्षाओं, सम्मेलन कक्ष, पुस्तकालय, कंप्यूटर प्रयोगशाला, खेल के मैदान, छात्रावास एवं अतिथि गृह जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं। कॉलेज में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए वर्चुअल क्लास रूम की सुविधा भी है ताकि कर विभिन्न अवसरों पर अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों से जुड़ प्रशिक्षुओं से बातचीत कराया जा सके। इसके अतिरिक्त शस्त्र प्रशिक्षण, मोटर मैकेनिक्स तथा प्राथमिक उपचार के क्षेत्रों में भी प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।

प्रशिक्षण हेतु संकाय सदस्यों का चयन सेवारत एवं सेवानिवृत्त वरिष्ठ वन अधिकारियों के साथ-साथ एम.एस. विश्वविद्यालय, बड़ौदा तथा नवसारी कृषि विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से किया जाता है। इसके अतिरिक्त तटरक्षक बल, तमिलनाडु पुलिस का विशेष कार्य बाल, गुजरात पुलिस, भारतीय वन्यजीव संस्थान आदि संस्थानों/विभागों को भी प्रशिक्षुओं को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से जोड़ा गया है।

कर्नाटक राज्य वन अकादमी की छविपूर्ववर्ती वन प्रशिक्षण संस्थान, गुंगरागट्टी, धारवाड़, जिसकी स्थापना वर्ष 1996 में हुई थी, जिसको उन्नत कर कर्नाटक राज्य वन अकादमी (क.रा.व.अ.), धारवाड़ बनाया गया। संस्थान का निर्माण कार्य वर्ष 1992 में विश्व बैंक सहायता प्राप्त सामाजिक वानिकी परियोजना के अंतर्गत प्रारंभ हुआ था तथा पश्चिमी घाट परियोजना के अंतर्गत वर्ष 1996 में पूर्ण हुआ। वर्ष 1996 में इसे वन प्रशिक्षण संस्थान के रूप में इस उद्देश्य से स्थापित किया गया था कि कर्नाटक वन विभाग के अधिकारियों को सेवारत प्रशिक्षण तथा नव-नियुक्त कर्मियों को प्रारंभिक प्रशिक्षण प्रदान किया जा सके। जिला मुख्यालय धारवाड़ से लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह परिसर लगभग 42.16 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है।

जनवरी 2015 में भारत सरकार ने वन प्रशिक्षण संस्थान, गुंगरागट्टी, धारवाड़ में वन रेंज अधिकारी अकादमी की स्थापना के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी और इसे वन अकादमी के दर्जे पर उन्नत किया गया तथा इसका नाम बदलकर कर्नाटक राज्य वन अकादमी, धारवाड़ रखा गया। साथ ही इसे वन शिक्षा निदेशालय द्वारा देश के उन प्रशिक्षण संस्थानों में से एक के रूप में मान्यता एवं पहचान प्रदान की गई, जो वन रेंज अधिकारियों को वानिकी प्रशिक्षण देने के लिए अधिकृत हैं।

कदम महाराष्ट्र की छविकदम (वन), कुंडल, महाराष्ट्र देश के प्रमुख संस्थानों में से एक है, जो वन विभाग तथा अन्य सरकारी विभागों के विभिन्न संवर्गों को प्रशिक्षण प्रदान करता है। प्रारंभ में इसकी स्थापना 15 अगस्त 2013 को महाराष्ट्र सरकार के राजस्व एवं वन विभाग के शासन निर्णय दिनांक 24/06/2011 के तहत वन प्रशिक्षण संस्थान के रूप में की गई थी।

महाराष्ट्र सरकार के राजस्व एवं वन विभाग के शासन निर्णय दिनांक 07/02/2014 के द्वारा अकादमी को स्वायत्त दर्जा प्रदान किया गया। इसके साथ ही राज्य वानिकी प्रशिक्षण सोसायटी का गठन किया गया, जिसे मुंबई चैरिटेबल ट्रस्ट अधिनियम, 1950 तथा सोसायटी अधिनियम, 1860 के अंतर्गत पंजीकृत किया गया है।

अकादमी में प्रशासनिक भवन, प्रशिक्षण संस्थान, मेस एवं जिम भवन, एक्जीक्यूटिव छात्रावास, बालक छात्रावास तथा महिला छात्रावास उपलब्ध हैं। अकादमी में कुल आठ कक्षाएँ हैं, जिनकी बैठक क्षमता 552 है तथा 3 कंप्यूटर लैब हैं, जिनमें 136 लोग बैठ सकते हैं। यहाँ छह छात्रावास हैं, जिनमें 300 प्रशिक्षुओं के रहने की व्यवस्था है। हाल ही में 175 की क्षमता वाले पृथक एक्जीक्यूटिव छात्रावास के निर्माण हेतु अनुदान मिली है तथा इसका कार्य प्रगति पर है।

अकादमी अत्याधुनिक कार्डियक जिम, नियमित व्यायाम जिम तथा पृथक महिला जिम की अच्छी सुविधाएं हैं। इसके अतिरिक्त बैडमिंटन कोर्ट, स्नूकर, टेबल टेनिस, लॉन टेनिस कोर्ट जैसी उत्तम खेल सुविधाएँ उपलब्ध हैं। प्रशिक्षुओं के मनोरंजन एवं व्यायाम के लिए 50 साइकिलें भी उपलब्ध कराई गई हैं।

परिसर पूर्णतः सुरक्षित है तथा सुरक्षा व्यवस्था महाराष्ट्र एक्स-सर्विसमैन कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा की जाती है। हरे-भरे उद्यान, सह्याद्री बायोलॉजिकल पार्क, बांस वाटिका तथा मियावाकी रोपण कुछ ऐसी जगहें हैं जो परिसर की शोभा बढ़ाने वाले प्रमुख आकर्षण हैं। प्रशिक्षुओं की नियमित चिकित्सीय जाँच हेतु अकादमी में पृथक विज़िटिंग मेडिकल ऑफिसर की सुविधा भी उपलब्ध है।

ओ.व.रें.कॉ. ओडिशा की छविओडिशा वन रेंजर्स कॉलेज, अंगुल की स्थापना वर्ष 1979 में ओडिशा के अंगुल ज़िले में की गई थी, जिसका उद्देश्य ओडिशा तथा बिहार, मध्य प्रदेश, जम्मू एवं कश्मीर, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह, असम, मिज़ोरम, अरुणाचल प्रदेश एवं नागालैंड जैसे अन्य राज्यों के नव-नियुक्त वन क्षेत्रपालों को प्रशिक्षण प्रदान करना है। यह राज्य का एक प्रमुख वन प्रशिक्षण संस्थान है, जो ओडिशा के मध्य में गहन वनों, वन्यजीव अभयारण्यों एवं एक टाइगर रिज़र्व के निकट स्थित है। इससे प्रशिक्षुओं को कक्षा शिक्षण के साथ-साथ क्षेत्रीय भ्रमण द्वारा व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त होता है। यह राज्य द्वारा संचालित कॉलेज अध्ययन पाठ्यक्रम से संबंधित सभी विषयों तथा प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण प्रदान करने के संदर्भ में वन शिक्षा निदेशालय, देहरादून के नियंत्रणाधीन कार्यरत है।

वर्ष 1979 से 1994–96 तक इस संस्थान से कुल 15 बैचों में 430 वन क्षेत्रपाल प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। वर्ष 1996 से 2017 तक कोई वन क्षेत्रपाल प्रशिक्षण पाठ्यक्रम आयोजित नहीं किया गया। परंतु मार्च 2018 में निदेशक, वन शिक्षा निदेशालय, देहरादून द्वारा ओडिशा राज्य के 111 वन रेंज प्रशिक्षुओं के लिए प्रारंभिक प्रशिक्षण आयोजित करने की अनुमति प्रदान की गई।

तमिलनाडु वन अकादमी, कोयंबटूर की छविकोयंबटूर स्थित पूर्ववर्ती मद्रास फ़ॉरेस्ट कॉलेज से विकसित, जिसकी गौरवशाली परंपरा एवं 108 वर्षों से अधिक का इतिहास रहा है, तमिलनाडु वन अकादमी आज देश के प्रमुख संस्थानों में से एक बन गई है। यह अकादमी वन वन रक्षकों से लेकर भारतीय वन सेवा अधिकारियों तक के वन कर्मियों के लिए सेवारत तथा प्रारंभिक प्रशिक्षण आयोजित करती है; अपने अस्तित्व के पिछले 10 वर्षों में अकादमी ने अनेक बैचों के वन अधिकारियों को व्यावसायिक ज्ञान एवं जरुरी कौशल प्रदान किया है, जिससे वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन एक कुशल वन प्रबंधक के रूप में कर सकें।

स्थापना से अब तक इस संस्थान ने नियमित प्रारंभिक प्रशिक्षण के अंतर्गत लगभग 54 सहायक वन संरक्षक, 5294 वन रेंज अधिकारी, 1587 वनपालों तथा 593 वन रक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान किया है। इसके अतिरिक्त विभिन्न विषय-आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से मंत्रालयिक कर्मचारियों सहित 5000 से अधिक वन कर्मियों को भी प्रशिक्षित किया गया है।

तेलंगाना राज्य वन अकादमी (ते.रा.व.अ.), हैदराबाद की छविइस प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना वर्ष 1926 में निज़ामाबाद में वन रक्षकों को प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से की गई थी। तत्पश्चात वर्ष 1928 में इसे महबूबाबाद स्थानांतरित किया गया। वर्ष 1930 में इसे उन्नत कर वनपालों को प्रशिक्षण देने की क्षमता विकसित की गई। बाद में वर्ष 1949 में अवसंरचना का विकास कर प्रशिक्षण केंद्र को पुनः येल्लेंदु स्थानांतरित किया गया, जहाँ से यह आंध्र क्षेत्र की प्रशिक्षण आवश्यकताओं को भी पूरा करने लगा।

हालाँकि, वर्ष 1987 में बदलती प्रौद्योगिकी एवं कार्य-पद्धतियों के अनुरूप क्षेत्रीय कर्मचारियों के कौशल को उन्नत करने के उद्देश्य से दुलापल्ली में राज्य वानिकी प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना की गई। वर्ष 2001 में इसका नाम बदलकर आंध्र प्रदेश वन अकादमी रखा गया तथा वनपालों का प्रशिक्षण फ़ॉरेस्ट स्कूल, येल्लेंदु से यहाँ स्थानांतरित कर दिया गया।

आंध्र प्रदेश वन अकादमी के नव-नियुक्त (प्रारंभिक) एवं सेवारत (पुनश्चर्या) दोनों प्रकार के वन विभागीय कर्मचारियों की प्रशिक्षण आवश्यकताओं की पूर्ति करती रही है। बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएँ तथा प्रतिष्ठित संसाधन व्यक्तियों के माध्यम से उच्च स्तरीय शैक्षणिक इनपुट उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 2006 में वन रक्षकों का प्रशिक्षण भी आंध्र प्रदेश वन अकादमी में स्थानांतरित कर दिया गया। वर्ष 2014 में तत्कालीन आंध्र प्रदेश राज्य के विभाजन तथा तेलंगाना राज्य के गठन के पश्चात इस अकादमी का नाम बदलकर तेलंगाना राज्य वन अकादमी कर दिया गया।

उत्तराखंड वानिकी प्रशिक्षण अकादमी (उ.वा.प्र.अ.), हल्द्वानी, उत्तराखंड की छविउत्तराखंड वानिकी प्रशिक्षण अकादमी, हल्द्वानी उत्तराखंड वन विभाग के अंतर्गत एक प्रमुख संस्थान है, जिसे विभिन्न वर्गों के अभ्यर्थियों को कई तरह का प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए जाना जाता है। इसकी स्थापना वर्ष 1978 में उत्तर प्रदेश वन विभाग के एक अंग के रूप में की गई थी।

स्थापना के बाद से ही अकादमी ने उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं और इसे भारत के शीर्ष वानिकी प्रशिक्षण संस्थानों में गिना जाता है। उत्तराखंड वन विभाग के प्रशासन एवं प्रबंधन के अंतर्गत यह अकादमी रेंज अधिकारियों, वनपालों तथा वन रक्षकों को प्रारंभिक प्रशिक्षण प्रदान करती है। इसके अतिरिक्त, यह अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों तथा वन निगम के कर्मचारियों के लिए त्रैमासिक पाठ्यक्रम भी आयोजित करती है। यह अकादमी नैनीताल जनपद के हल्द्वानी (उत्तराखंड) में स्थित है, जहाँ से देश के अन्य भागों के लिए रेल एवं बस सेवा की अच्छी कनेक्टिविटी उपलब्ध है।

अकादमी का प्रशासन भारतीय वन सेवा (भा.व.से.) के एक अधिकारी द्वारा किया जाता है, जो मुख्य वन संरक्षक के पद पर होते हैं। उनके अधीन एक अतिरिक्त निदेशक, कुछ उप निदेशक, जो भारतीय वन सेवा तथा प्रांतीय वन सेवा दोनों से होते हैं तथा सहायक निदेशक और वन क्षेत्र अधिकारी कार्यरत रहते हैं, जो अकादमी के प्रशासनिक एवं शैक्षणिक कार्यों के सुचारु संचालन को सुनिश्चित करते हैं। इनके अतिरिक्त, प्रशिक्षण प्रदान करने हेतु अन्य संकाय सदस्य भी अकादमी में कार्यरत हैं। लिपिकीय स्टाफ, वनपालों एवं वन रक्षक अकादमी की दैनिक गतिविधियों का संचालन करते हैं।

संस्थान में उत्कृष्ट एवं विस्तृत आधारभूत संरचना उपलब्ध है, जिसमें विशाल प्रशासनिक एवं शैक्षणिक भवन, अतिथि गृह, बालक एवं बालिका प्रशिक्षुओं हेतु छात्रावास, मेस, पुस्तकालय, खेल का मैदान, व्याख्यान केंद्र, जिम तथा सभागार आदि शामिल हैं। अकादमी का पुस्तकालय पुस्तकों के व्यापक संग्रह के साथ एक महत्वपूर्ण संपदा है। प्रशासनिक एवं शिक्षण स्टाफ परिसर में ही निवास करता है, जिससे छात्रों को चौबीसों घंटे मजबूत तकनीकी एवं शैक्षणिक सहयोग प्राप्त होता है। अकादमी प्रशासन प्रशिक्षण उद्देश्यों के लिए उच्च एवं आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करता है, ताकि प्रशिक्षु अपने क्षेत्र में प्रचलित नवीन तकनीकों के उपयोग से परिचित हो सकें।

चंद्रपुर वन प्रशासन, विकास एवं प्रबंधन अकादमी (च.व.प्र.वि. व प्र.अ.), चंद्रपुर, महाराष्ट्र की छवि वर्ष 2014 में, महाराष्ट्र सरकार के वन विभाग ने वन प्रशिक्षण संस्थान, चंद्रपुर के स्तर को उन्नत कर उसे राज्य वन अकादमी के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया। इसका उद्देश्य केवल वन अधिकारियों को सेवाकालीन प्रशिक्षण प्रदान करना ही नहीं था, बल्कि इस अकादमी के माध्यम से कुशल मानव संसाधन विकसित करना भी था, जो महाराष्ट्र राज्य की वन संपदा के सुचारु प्रबंधन के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसी दृष्टि को ध्यान में रखते हुए, चंद्रपुर वन अकादमी की योजना राज्य एवं देश की अन्य वन अकादमियों की तुलना में व्यापक लक्ष्यों और उद्देश्यों के साथ बनाई गई।

चंद्रपुर वन अकादमी का विकास कार्य तीव्र गति से पूर्ण किया गया। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप भव्य भवन एवं आधारभूत संरचना सुविधाएँ विकसित की गईं। प्रशिक्षुओं के लिए आवासीय सुविधाओं सहित प्रशिक्षण अकादमी हेतु आवश्यक उन्नत आधारभूत संरचना भी निर्मित की गई है। इसके साथ ही नवीनतम सूचना एवं प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए एक आधुनिक सभागार भी तैयार किया गया है। इस भवन की भव्यता स्वयं ही वन अकादमी के विस्तार और उन्नयन की कहानी बया करती है।

महाराष्ट्र राज्य ने चंद्रपुर वन अकादमी के लिए जटिल एवं बहुआयामी कार्य, उद्देश्य और लक्ष्य निर्धारित किए हैं। राज्य सरकार ने इस अकादमी की भूमिका को केवल अपने वन अधिकारियों के प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे शिक्षा, अनुसंधान एवं विकास, जनजागरूकता, सुरक्षा तथा वन्यजीव संरक्षण जैसे दायित्व भी प्रदान किए हैं।