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सेवाकालीन प्रशिक्षण

परिचय

निदेशालय के कार्यक्षेत्र का एक अन्य प्रमुख क्षेत्र सेवारत राज्य वन सेवा अधिकारियों तथा वन रेंज अधिकारियों के लिए सेवाकालीन प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों का आयोजन करना है। इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य ज्ञान को अद्यतन करना, कौशल में सुधार करना, दृष्टिकोण को परिष्कृत करना तथा प्रतिभागियों को वानिकी क्षेत्र में विश्वभर में चल रहे नवीनतम विकासों की ओर उन्मुख करना है। सामान्यतः प्रत्येक अकादमी में एक शैक्षणिक वर्ष के दौरान छह से आठ सेवाकालीन प्रशिक्षण पाठ्यक्रम आयोजित किए जाते है। JICA परियोजना के तहत सेवाकालीन प्रशिक्षण के लिए उन्नत प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला मॉड्यूल विकसित किए गए हैं।

ये एक सप्ताह की प्रशिक्षण-सह-कार्यशालाएँ वानिकी एवं वन्यजीव से संबंधित कानूनी मुद्दे, प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण, वन्यजीव प्रबंधन, मानव संसाधन प्रबंधन तथा सामुदायिक वानिकी एवं संयुक्त वन प्रबंधन जैसे विशिष्ट विषयों पर केंद्रित होती हैं। इसके अतिरिक्त, राज्य वन सेवा में सम्मिलित वन रेंज अधिकारियों के लिए एक सप्ताह का सामान्य पुनश्चर्या पाठ्यक्रम भी आयोजित किया जाता है।

अकादमियों द्वारा आयोजित एक सप्ताह की विषय-आधारित अल्पकालिक पाठ्यक्रमों का वर्षवार विवरण निम्नानुसार है:

क्रम संख्या प्रशिक्षण कार्यशाला / जीआरसी का नाम अवधि प्रतिभागियों की संख्या पाठ्यक्रम रिपोर्ट
के.अ.रा.व.से., बर्नीहाट
1. वन्यजीव प्रबंधन 19.01.2026 से 24.01.2026 - -
के.अ.रा.व.से., कोयंबटूर
1. सामान्य पुनश्चर्या पाठ्यक्रम 18.08.2025 से 22.08.2025 29 रिपोर्ट देखें

फ़ॉर्मेट: पीडीएफ
साइज़ : 3.17 एमबी
भाषा: अंग्रेजी
2 वन्यजीव प्रबंधन 19.01.2026 से 23.01.2026 - -
के.अ.रा.व.से., देहरादून
1. वन एवं वन्यजीव कानूनों में संशोधन 16.02.2026 से 20.02.2026 - -

क्रम संख्या प्रशिक्षण कार्यशाला / जीआरसी का नाम अवधि प्रतिभागियों की संख्या पाठ्यक्रम रिपोर्ट
के.अ.रा.व.से., बर्नीहाट
1. वन्यजीव प्रबंधन 16.12.2024 से 20.12.2024 17 रिपोर्ट देखें फ़ॉर्मेट: पीडीएफ
साइज़ : 6.53 एमबी
भाषा: अंग्रेजी
के.अ.रा.व.से., कोयंबटूर
1. सामान्य पुनश्चर्या पाठ्यक्रम 27.01.2025 से 31.01.2025 16 रिपोर्ट देखें फ़ॉर्मेट: पीडीएफ
साइज़ : 2.29 एमबी
भाषा: अंग्रेजी
2 वानिकी एवं वन्यजीव से संबंधित कानूनी मुद्दे 24.02.2025 से 28.02.2025 24 रिपोर्ट देखें फ़ॉर्मेट: पीडीएफ
साइज़ : 3.83 एमबी
भाषा: अंग्रेजी
के.अ.रा.व.से., देहरादून
1. हरित अवसंरचना 20.01.2025 से 24.01.2025 24 रिपोर्ट देखें फ़ॉर्मेट: पीडीएफ
साइज़ : 4.40 एमबी
भाषा: अंग्रेजी

क्रम संख्या प्रशिक्षण कार्यशाला / जीआरसी का नाम के.अ.रा.व.से., कोयंबटूर CASFOS, Burnihat
अवधि प्रतिभागियों की संख्या पाठ्यक्रम रिपोर्ट अवधि प्रतिभागियों की संख्या पाठ्यक्रम रिपोर्ट
1. सामुदायिक वानिकी एवं संयुक्त वन प्रबंधन

09.10.2023 से 13.10.2023

15

रिपोर्ट देखें फॉर्मेट: पीडीएफ
साइज़ : 3.66 एमबी
भाषा: अंग्रेजी

-

-

-

2. वन्यजीव प्रबंधन

20.11.2023 से 24.11.2023

31

रिपोर्ट देखें रिपोर्ट देखें फॉर्मेट: पीडीएफ
साइज़ : 2.74 एमबी
भाषा: अंग्रेजी

08.01.24 से 12.01.24

19

रिपोर्ट देखें फॉर्मेट: पीडीएफ
साइज़: 6.68 एमबी
भाषा: अंग्रेजी

क्रम सं. प्रशिक्षण कार्यशाला / जीआरसी का नाम के.अ.रा.व.से., कोयंबटूर के.अ.रा.व.से., देहरादून के.अ.रा.व.से., बर्नीहाट
प्रतिभागियों की संख्या अवधि पाठ्यक्रम रिपोर्ट प्रतिभागियों की संख्या अवधि पाठ्यक्रम रिपोर्ट प्रतिभागियों की संख्या अवधि पाठ्यक्रम रिपोर्ट
1 मानव संसाधन प्रबंधन 23 19.09.2022 से 24.09.2022 - 32 05.12.2022 से 10.12.2022 रिपोर्ट देखें फ़ॉर्मेट: पीडीएफ
साइज़ : 2.80 एमबी
भाषा: अंग्रेज़ी
- - -
2 वानिकी एवं वन्यजीव में कानूनी मसौदा 34 07.11.2022 से 12.11.2022 - 29 17.10.2022 से 22.10.2022 रिपोर्ट देखें फ़ॉर्मेट: पीडीएफ
साइज़ : 2.99 एमबी
भाषा: अंग्रेज़ी
17 12.12.2022 से 17.12.2022 रिपोर्ट देखें फ़ॉर्मेट: पीडीएफ
साइज़ : 3.13 एमबी
भाषा: अंग्रेज़ी
3 वन्यजीव प्रबंधन 37 04.07.2022 से 09.07.2022 - 34 19.09.2022 से 24.09.2022 रिपोर्ट देखें फ़ॉर्मेट: पीडीएफ
साइज़ : 3.59 एमबी
भाषा: अंग्रेज़ी
- - -
4 प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण 29 06.06.2022 से 11.06.2022 - 23 31.10.2022 से 05.11.2022 रिपोर्ट देखें फ़ॉर्मेट: पीडीएफ
साइज़ : 1.89 एमबी
भाषा: अंग्रेज़ी
- - -
5 वन प्रबंधन हेतु पारितंत्र दृष्टिकोण - - - 25 14.11.2022 से 19.11.2022 रिपोर्ट देखें फ़ॉर्मेट: पीडीएफ
साइज़: 9.22 एमबी
भाषा: अंग्रेज़ी
- - -
6 सतत आजीविका हेतु जैव विविधता संरक्षण 31 02.05.2022 से 07.05.2022 - 26 05.09.2022 से 10.09.2022 - - - -
7 सामान्य पुनश्चर्या पाठ्यक्रम 29 12.12.2022 से 17.12.2022 - - - - - - -
  कुल योग 183 +   169 +   17 = 369

सामान्य पुनश्चर्या पाठ्यक्रम को इस प्रकार तैयार किया गया है कि सेवारत अधिकारियों के व्यावसायिक कौशल को पुनः सुदृढ़ किया जा सके तथा उन्हें क्षेत्र से संबंधित सभी स्तरों—क्षेत्रीय, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय समस्याओं से अवगत कराया जा सके। इनमें वानिकी एवं संबंधित विषयों में संरक्षित क्षेत्र प्रबंधन, जैव-विविधता संरक्षण, वैश्विक तापमान आदि जैसे विषय शामिल हैं। यह एक सप्ताह का पाठ्यक्रम सामान्यतः राज्य वन सेवा/वन क्षेत्र अधिकारी संवर्ग के पदोन्नत अधिकारियों के लिए अनुशंसित है।

लगातार बढ़ती आबादी महानगरों के स्थान और संसाधनों पर दबाव डाल रही है। छोटे शहरों में भी इसका प्रभाव दिखने लगा है। वन, उनके संसाधन और वन्यजीव भी इस परिघटना से अछूते नहीं हैं। अक्सर वनों, संरक्षित क्षेत्रों, वन्यजीव आदि से संबंधित अधिनियमों, नियमों एवं विनियमों के विभिन्न प्रावधानों का उल्लंघन देखने को मिलता है और इनमें वृद्धि दिखाई दे रही है।

वन एवं वन्यजीव से जुड़े अलग-अलग अपराधों को रोकने और शीघ्र पता लगाने के अलावा अपराधियों को ज़्यादा से ज़्यादा सज़ा देना भी ज़रूरी है। आखिरकार वर्तमान और अतीत की तरह अपराधों पर असरदार तरीके से मुकदमा चलाना ही भविष्य में अपराध करने वालों के लिए सबसे बड़ी रुकावट है। यह स्थिति वनों और वन्यजीवों की देखरेख में लगे कार्मिकों के समक्ष अपनी कानूनी जानकारी और दक्षता को उन्नत एवं अद्यतन करने की चुनौती खड़ी कर रही है। इस पाठ्यक्रम को तैयार करते समय जानकारी, कौशल और मौजूदा अधिनियमों, नियमों और प्रक्रियाओं की उचित व्याख्या जैसी बातों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।

ट्रेनिंग की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि प्रशिक्षण की ज़रूरतों को पहचानकर उसे मांग-आधारित बनाया जाए, परिवर्तन की आवश्यकताओं के अनुरूप वैज्ञानिक ढंग से डिज़ाइन किया जाए, शिक्षार्थी-केंद्रित दृष्टिकोण से प्रभावी रूप में प्रदान किया जा सके और आगे मूल्यवर्धन हेतु निगरानी/मूल्यांकन किया जा सके। इसके अतिरिक्त, मेंटरिंग और सुविधा-प्रदान कार्यप्रणाली का अभिन्न अंग बन गया है। प्रशिक्षण के नवीनतम रुझानों सहित इन सभी पहलुओं को इस पाठ्यक्रम की रूपरेखा तैयार करते समय ध्यान में रखा गया है।

राज्य वन प्रशिक्षण संस्थानों में संगठनात्मक पदस्थापनों से आने वाले प्रशिक्षकों की क्षमता निर्माण की चुनौती हमेशा से रही है। इस आवश्यकता की पूर्ति हेतु “प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण” कार्यक्रम को एक व्यवस्थित प्रशिक्षण दृष्टिकोण के साथ प्रस्तावित किया गया है, जिसका नेतृत्व भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा पिछले दो दशकों से किया जा रहा है।

वन संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन को सुनिश्चित करने के लिए जिन महत्वपूर्ण विषय का विश्लेषण किया जाना चाहिए, उनमें से एक है मौजूदा मानव संसाधन की क्षमता और उन्हें सुदृढ़ बनाना। राज्यों के वन विभागों का प्रदर्शन सभी अधिकारियों/कर्मचारियों के सामूहिक योगदान पर निर्भर करता है।

वन संसाधनों के संरक्षण, संवर्धन एवं सतत प्रबंधन के लिए वानिकी कार्मिकों की क्षमता निर्माण का दृष्टिकोण, जिसमें उपयुक्त प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाए और साथ ही हितधारकों के साथ मिलकर कार्य करने की भावना विकसित की जाए, इन्हें संस्थागत रूप देने की आवश्यकता है। इसमें अधिकार का विवेकपूर्ण उपयोग तथा संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन हेतु कार्यबल को प्रेरित बनाए रखना शामिल है।

लगातार बढ़ती मानव जनसंख्या लंबे समय से वनों और वन्यजीव सहित प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव डाल रही है। मानव जाति के अस्तित्व के लिए वन्यजीवों का संरक्षण और संवर्धन अत्यंत आवश्यक है।

यद्यपि वर्तमान सामाजिक-आर्थिक तथा मानव-नियंत्रित परिवेश में मनुष्य और पशुओं के सह-अस्तित्व की परिकल्पना करना कठिन है, फिर भी इन प्राकृतिक पारितंत्रों में वन्यजीवों के लिए विशिष्ट क्षेत्र बनाए रखे जा सकते हैं।

वर्तमान समय में वानिकी के सामाजिक पहलू के महत्व पर विशेष जोर देने की आवश्यकता नहीं है। दुनिया भर में तेजी से बढ़ती मानव जनसंख्या के साथ ईंधन लकड़ी, चारा और काष्ठ की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वनों पर दबाव अनुपातिक रूप से बढ़ गया है। मानवजनित दबाव के कारण प्राकृतिक पारितंत्रों पर पड़ने वाले तनाव अब केवल अस्तित्व के संघर्ष तक सीमित न रहकर, प्राकृतिक पारितंत्रों और उनमें निवास करने वाले असंख्य जीवों के लिए मानो युद्ध जैसे हालात पैदा हो गए है।

वानिकी के मानव पहलू की इस स्वीकृति के फलस्वरूप 1970 और 1980 के दशक में सामाजिक एवं सामुदायिक वानिकी कार्यक्रमों का क्रियान्वयन किया गया। आगे चलकर वनों पर लोगों के अधिकारों तथा वानिकी में उनकी भूमिका की मान्यता 1991 में संयुक्त वन प्रबंधन प्रस्ताव के रूप में सामने आई।

भारत सरकार, राज्यों के अग्रिम पंक्ति के वन कर्मियों (उप रेंजर / वनपालों/ वन रक्षक) की क्षमता निर्माण हेतु राज्य सरकारों के प्रयासों को सहयोग प्रदान करती है। इसके अंतर्गत, जिस राज्य के वन विभाग में पाठ्यक्रम आयोजित किया जाता है, वहां के 25–30 प्रतिभागियों के समूह हेतु प्रत्येक साप्ताहिक अवधि के अल्पकालिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम आयोजित करने हेतु धनराशि उपलब्ध कराई जाती है।

राज्य वन विभाग इन पाठ्यक्रमों के आयोजन के लिए आधारभूत सुविधाएं (जैसे व्याख्यान कक्ष, छात्रावास आवास आदि) तथा रिसोर्स पर्सन की व्यवस्था करता है। पाठ्यक्रम की कुल अवधि 6 दिन (प्रति दिन 4 सत्र), जिनमें से 1 दिन क्षेत्र भ्रमण/अध्ययन अभ्यास के लिए दिया जा सकता है।