निदेशक का संदेश
देश में वानिकी परिदृश्य ने पिछले दो दशकों के दौरान महत्वपूर्ण परिवर्तन देखे हैं। इसलिए वन अधिकारियों को अलग-अलग तरह के कौशल सीखने पड़ते हैं ताकि वे वनों को कई कामों के लिए सही तरीके से संभाल सकें। वन शिक्षा निदेशालय आधुनिक वन अधिकारियों की अपेक्षित क्षमताओं को बढ़ाने का प्रयास कर रहा है, जो उभरती सामाजिक और शासन संबंधी परिस्थितियों के अनुरूप हो।
वन शिक्षा निदेशालय का मुख्य कार्य राज्य वन सेवा अधिकारियों और वन राजिक अधिकारियों को शुरुआती एवं सेवा-कालीन प्रशिक्षण देना है। इसके अतिरिक्त यह उप-वन क्षेत्रपाल, वनपाल और वनरक्षकों जैसे वन के अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों को भी सेवा-कालीन प्रशिक्षण में मदद करता है। वन शिक्षा निदेशालय अपनी तीन केंद्रीय अकादमियों के द्वारा अन्य हितधारकों जैसे गैर सरकारी संगठन, स्कूल के शिक्षक और छात्रों, तथा अन्य सेवाओं के कर्मचारी को भी प्रशिक्षण देता है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के बटालियनों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वनाग्नि प्रबंधन पर विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल भी तैयार किए गए हैं।
हम अभी राज्य वन सेवा और वन क्षेत्र अधिकारियों के लिए प्रवेश और प्रशिक्षण नियम 2004 में संशोधन करने पर ध्यान दे रहे हैं, ताकि उन्हें राष्ट्रीय कार्य योजना संहिता 2023 में हुए नए विकासों जैसे वन अधिकार, जलवायु परिवर्तन, भू-स्थानिक तकनीकों का उपयोग, जैव विविधता, वनों के सतत प्रबंधन के लिए मानदंड और संकेतकों आदि की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जा सके।
प्रशिक्षण की बेहतर रूपरेखा बनाना तथा "प्रशिक्षण हेतु व्यवस्थित दृष्टिकोण" पर आधारित पाठ्य सामग्री तैयार करना निदेशालय का एक अन्य महत्वपूर्ण कार्य है। सेवा कार्यशालाओं में भाग लेने वाले वरिष्ठ राज्य वन सेवा सत्रों के संकाय सदस्यों के साथ-साथ वन अधिकारियों को क्षेत्र-उन्मुख प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करने और मौजूदा प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में सुधार के लिए विचार-विमर्श सत्रों में शामिल किया गया है।
मैं सभी केंद्रीय अकादमियों और राज्य वन प्रशिक्षण संस्थानों के प्रमुखों और संकाय सदस्यों के वन अधिकारीयों की क्षमता बनाने के प्रयासों की सराहना करती हूँ और उनके नेक प्रशिक्षण कार्यों के लिए उन्हें शुभकामनाएँ देती हूँ।
निदेशक वन शिक्षा

